मेरे ब्लॉग परिवार के सदस्य

बुधवार, 26 अक्तूबर 2011

शुभकामनाएं

शुभकामनाएँ
______________


दो छोटी छोटी रचनाएँ प्रस्तुत हैं ,,नई तो नहीं है लेकिन शायद बहुत कम लोगों की पढ़ी हुई है ,,

आप सभी को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं


मन में ज्ञान का दीप जलाकर ,
अंतर्मन से प्रश्न करें .
हम ने कैसे कर्म किए हैं ?
गर्व करें या शर्म करें?
अंतर्मन ही न्यायधीश है,
वो तो सच्ची बात कहेगा.
इस दीवाली न्यायधीश की ,
बात सुनें और कर्म करें .


दीपावली के नन्हे दिए सीख देते हैं
तुम ख़ुद जलो पर आंच किसी और पर न आए
सद्भावना के दीप में बाती हो प्यार की
आतंकवाद जिन के उजालों से हार जाए

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब ..
    .. आपको दीपोत्‍सव की शुभकामनाएं !!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहु.त सुन्दर कवितायें हैं इस्मत. अच्छा किया इन्हें पुनर्प्रकाशित करके.
    दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  3. दिवाली पर्व है खुशिओं का, उजालों का, लक्ष्मी का, इस दिवाली आपकी जिंदगी खुशिओं से भरी हो, दुनियां उजालों से रोशन हो, घर पर माँ लक्ष्मी का आगमन हो!
    शुभ दीपावली!

    उत्तर देंहटाएं
  4. सबके मन का अन्धतम मिटे, सबका जीवन सफल हो।

    उत्तर देंहटाएं
  5. मन में ज्ञान का दीप जलाकर ,
    अंतर्मन से प्रश्न करें .
    wah....kya baat hai.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर...
    सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  7. सुन्दर प्रस्तुति...दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  8. सुन्दर और सार्थक सन्देश देती रचनाएँ

    दीपावली की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  9. सुन्दर प्रस्तुति
    दिवाली, भाई दूज और नव वर्ष की शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  10. इस्मत जी
    सद्भावना के दीप में बाती हो प्यार की
    आतंकवाद जिन के उजालों से हार जाए
    बहुत शानदार इल्तिजा है ...... ! दीवाली कि शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  11. मन में ज्ञान का दीप जलाकर ,
    अंतर्मन से प्रश्न करें .
    हम ने कैसे कर्म किए हैं ?
    गर्व करें या शर्म करें?

    यही सच्ची दीपावली होगी .....
    बुरे कर्म करके भले ही लाख दीप जला लें अंतर्मन में आत्मविश्वास का दीप कभी नहीं जल सकता .....

    उत्तर देंहटाएं
  12. .



    *आदरणीया आपा इस्मत ज़ैदी जी *
    प्रणाम !
    कुछ विलंब से ही सही , इन ख़ूबसूरत पंक्तियों को पढ़ने का आनंद मिला …

    मन में ज्ञान का दीप जलाकर , अंतर्मन से प्रश्न करें
    हम ने कैसे कर्म किए हैं ? गर्व करें या शर्म करें?

    मेरे मन के बहुत करीब हैं आपकी रचना के भाव …

    हमेशा की तरह सुंदर श्रेष्ठ सृजन के लिए हार्दिक बधाई ! शुभकामनाएं ! मंगलकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं

ख़ैरख़्वाहों के मुख़्लिस मशवरों का हमेशा इस्तक़्बाल है
शुक्रिया