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रविवार, 20 मार्च 2011

........ होली नफ़रत से इंकार

होली के शुभ अवसर पर एक गीत प्रस्तुत है 
आप सभी को होली बहुत बहुत मुबारक हो 

होली नफ़रत से इंकार
-_____________________

है होली रंगों का त्योहार
ये रंग बाँटे हैं सब में प्यार

न इन में द्वेष घोलना

ये सुंदर भावों का संचार
है इक दूजे की ये मनुहार

न इन में द्वेष घोलना

है होली नफ़रत से इंकार
दिलों के बीच न हो व्यापार

न इन में द्वेष घोलना

है पिचकारी वो प्रेम की धार
गिरा दे नफ़रत की दीवार

न इन में द्वेष घोलना

हैं इन रंगों के अर्थ हज़ार
नहीं हैं केवल ये बौछार

न इन में द्वेष घोलना

_______________________________
___________________________________

28 टिप्‍पणियां:

  1. सार्थक सन्देश देती होली मय रचना ...होली की शुभकामनायें

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  2. हैं इन रंगों के अर्थ हज़ार
    नहीं हैं केवल ये बौछार
    holi kee shubhkamnayen

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  3. अच्‍छी कविता। होली मुबारक !

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  4. अच्छा गीत है..बिलकुल सही मौके पर

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  5. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (21-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  6. सार्थक संदेश...

    नेह और अपनेपन के
    इंद्रधनुषी रंगों से सजी होली
    उमंग और उल्लास का गुलाल
    हमारे जीवनों मे उंडेल दे.

    आप को सपरिवार होली की ढेरों शुभकामनाएं.
    सादर
    डोरोथी.

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  7. बहुत सुंदर सन्देश...होली की हार्दिक शुभकामनायें ...

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  8. हैं इन रंगों के अर्थ हज़ार
    नहीं हैं केवल ये बौछार
    is pyaari rachna ke saath holi ki badhai

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  9. है पिचकारी वो प्रेम की धार
    गिरा दे नफ़रत की दीवार
    हैं इन रंगों के अर्थ हज़ार
    नहीं हैं केवल ये बौछार

    होली के त्यौहार के माध्यम से
    सुन्दर और आसान शब्दों में
    बहुत सार्थक सन्देश दिया है आपने...
    गीत, कह भी रहा है
    होली नफ़रत से इंकार

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  10. बौत सुन्दर गीत है इस्मत. इसे अपनी आवाज़ में ब्लॉग पर लगाओ न.

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  11. प्रिय आपा इस्मत ज़ैदी जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !
    रंग भरा प्रणाम !

    आज गीत ! वाऽऽह !
    आपके भी अलग अलग रूप सामने आ रहे हैं :)

    है होली रंगों का त्योहार
    ये रंग बाँटे हैं सब में प्यार
    न इन में द्वेष घोलना

    ये सुंदर भावों का संचार
    है इक दूजे की ये मनुहार
    न इन में द्वेष घोलना


    बहुत अच्छा गीत लिखा आपने … हार्दिक बधाई !


    आपके स्वर के साथ ही है मेरा स्वर …
    देखिए -

    होली के दिन भूलिए भेदभाव अभिमान !
    रामायण से मिल गले मुस्काए कुरआन !!

    हिन्दू मुस्लिम सिक्ख का फर्क रहे ना आज
    मौसम की मनुहार की रखिएगा कुछ लाज !!

    क्या होली क्या ईद सब पर्व दें इक सन्देश !
    हृदयों से धो दीजिए बैर अहम् विद्वेष !!


    ♥ होली की शुभकामनाएं ! मंगलकामनाएं !♥


    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  12. रंगों का त्यौहार बहुत मुबारक हो आपको और आपके परिवार को|
    कई दिनों व्यस्त होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका

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  13. है पिचकारी वो प्रेम की धार
    गिरा दे नफ़रत की दीवार

    न इन में द्वेष घोलना

    हैं इन रंगों के अर्थ हज़ार
    नहीं हैं केवल ये बौछार...

    होली पर एकता का सार्थक संदेश दिया है आपने.

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  14. है पिचकारी वो प्रेम की धार
    गिरा दे नफ़रत की दीवार ...

    बहुत खूब ... होली तो सच में उमंग, खुशियों और रतांगो का त्योहार है ... और ये सब तो हर किसी को चाहिए होता है ...
    सही संदेश देता है आपका मस्ती भरा गीत ....
    आपको और आपके पूरे परिवार को होली की मंगल कामनाएँ ...

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  15. बहुत बढ़िया लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!
    आपको एवं आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  16. छंद के साथ सुन्दर सा गीत रचा है आपने ...

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  17. तारीफ़ करूँगा तो आप कहेंगी छोटी बहन को सर चढ़ा रहे हैं...लेकिन क्या करूँ जो बात सच है उसे सच ही कहना पड़ेगा...तारीफ़ की बात की तो तारीफ़ करनी ही पड़ेगी...वो भी ऐसी बहन की जिस पर कोई भी भाई नाज़ करे...बेहतरीन कविता लगी...होली हालाँकि गुज़र चुकी है लेकिन उसकी मस्ती अभी भी फिजा में है...तीन दिनों बाद आफिस लौटा और ये कविता देख पढ़ कर दिल खुश हो गया...लिखती रहो...यूँ ही...

    नीरज

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  18. आप सभी पाठकों का बहुत बहुत शुक्रिया कि आप ने इस कविता को पढ़ने का समय निकाला ,न सिर्फ़ ये कि पढ़ा बल्कि सराहा भी

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  19. इस्मत जी,

    बहुत सुन्दर गीत प्रेम और स्नेह की बौछार करता हुआ।

    आपकी शुभकामनाएं मिली
    हम रंग से सरोबार हुए
    शुभकामनाएं हमारी आपको भिगो दें
    हम पिचकारी की धार हुए

    होली पर रंग भरी शुभकामनायें

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

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  20. है होली नफ़रत से इंकार
    दिलों के बीच न हो व्यापार

    होली पर आपने दिल की बात कह दी !
    हर पंक्ति से सदभावना और भाई-चारे का सन्देश मुखरित हो रहा है !
    आभार !

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  21. हैं इन रंगों के अर्थ हज़ार
    नहीं हैं केवल ये बौछार

    न इन में द्वेष घोलना


    होली पर सार्थक सन्देश देती हुई सुन्दर रचना.

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  22. इश्मत जी !! आपकी कविता ने होली के कई रंगों की बौछार हम पर डाल दी.. बहुत सुन्दर पैगाम के साथ... शुभकामनाएँ

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ख़ैरख़्वाहों के मुख़्लिस मशवरों का हमेशा इस्तक़्बाल है
शुक्रिया