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शनिवार, 14 मई 2011

ग़ज़ल

"उस का पावन मन देखा है"
इस तरही मिसरे पर लिखी गई ग़ज़ल पेश ए ख़िदमत है 

............पावन मन देखा है
___________________________ 

अंबर छाया घन देखा है 
तब मयूर नर्तन देखा है 

धरती का मन आँगन भीगे 
रिमझिम वो सावन देखा है 

सूनी आँखें ,लब पर आहें
क़िस्मत से अनबन देखा है 

झील सी गहरी उन आँखों में 
"उस का पावन मन देखा है"

नाज़ुक जज़्बों का संवाहक 
हाथों में कंगन देखा है 

जो रिश्तों को बाँध के रक्खे
प्यार का वो बँधन देखा है 

जीवन का हर रंग हो जिस में 
ऐसा एक सपन देखा है 

मैला मन भी पावन कर दे 
मुस्काता बचपन देखा है 

स्वार्थ ’शेफ़ा’ की आदत उस ने 
दु:ख में बस अर्चन देखा है 

________________________________________

33 टिप्‍पणियां:

  1. नाज़ुक जज़्बों का संवाहक
    हाथों में कंगन देखा है

    बहुत खूब. बहुत नज़ाकत है इन पंक्तियों में.

    मैला मन भी पावन कर दे
    मुस्काता बचपन देखा है
    सचमुच, बचपन इतना ही पवित्र और मासूम होता है. बहुत सुन्दर ग़ज़ल.

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  2. काश यह रचना मेरे किस्मत में होती ........... :-(
    बधाई आपको !!

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  3. मैला मन भी पावन कर दे
    मुस्काता बचपन देखा है
    स्वार्थ ’शेफ़ा’ की आदत उस ने
    दु:ख में बस अर्चन देखा है

    क्या बात है....बड़ी ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल है...

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  4. जीवन का हर रंग हो जिस में
    ऐसा एक सपन देखा है
    ग़ज़ल में कहे गए ऐसे उम्दा अशार
    लेखन की पुख्तगी के ज़ामिन होते हैं..
    वाह
    सूनी आँखें ,लब पर आहें
    क़िस्मत से अनबन देखा है
    ज़िन्दगी के किन्ही अनजाने पलों से
    बातें करता हुआ शेर ....
    ग़ज़ल पढ़ कर लग रहा है क
    पत्रिका 'नयी लेखनी' में
    कुछ अच्छी गज़लें भी प्रकाशित हुई हैं

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  5. जिसे किसी का पावन मन दिख जाये तो पूरा व्यक्तित्व दिख जाता है। बहुत सुन्दर।

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  6. जो रिश्तों को बाँध के रक्खे
    प्यार का वो बँधन देखा है

    मैला मन भी पावन कर दे
    मुस्काता बचपन देखा है

    यूं तो ग़ज़ल के सभी अशआर बहुत अच्छे हैं,
    ये दो खास तौर पर पसंद आए.

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  7. मैला मन भी पावन कर दे
    मुस्काता बचपन देखा है


    aapaa,

    kaafi din baad aanaa huaa.....
    is she'r ko padha to hothon par muskuraahat aa gayi...


    :)

    bachpan ke jaisi...



    नाज़ुक जज़्बों का संवाहक
    हाथों में कंगन देखा है

    aur yr she'r...
    bahut hi sunder.....kitna pyaaraa likhaa hai aapaa ...

    उत्तर देंहटाएं
  8. जीवन का हर रंग हो जिस में
    ऐसा एक सपन देखा है

    मैला मन भी पावन कर दे
    मुस्काता बचपन देखा है
    maja aa gaya padhkar kitni sundar kavita hai

    नाज़ुक जज़्बों का संवाहक
    हाथों में कंगन देखा है
    is sher ke to kahne hi kya laazwaab .

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  9. मैला मन भी पावन कर दे
    मुस्काता बचपन देखा है ..
    बहुत सुंदर रचना, धन्यवाद

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  10. झील सी गहरी उन आँखों में
    "उस का पावन मन देखा है"

    paawan mann jaaye, isse jyada aur kya chahiye.....

    good one....

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  11. झील सी गहरी उन आँखों में
    "उस का पावन मन देखा है"

    बहुत ही सुंदर ग़ज़ल...

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  12. झील सी गहरी उन आँखों में
    "उस का पावन मन देखा है"..
    सीधी .. सच्ची और दिल में सीधे उतार जाने वाली ग़ज़ल ... सरल शदों में कही हुई कोई भी बात दिल में उतरती है .... बहुत ही पाकीज़ा ग़ज़ल है ...

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  13. मैला मन भी पावन कर दे
    मुस्काता बचपन देखा है ..

    यूं तो हर पंक्ति बेमिसाल है ... पर इन पंक्तियों के लिये विशेषत: बधाई ।

    उत्तर देंहटाएं
  14. नाज़ुक जज़्बों का संवाहक
    हाथों में कंगन देखा है
    बहुत अच्छी गज़ल ...

    उत्तर देंहटाएं
  15. "उस के क़लम ने सच के सिवा कुछ नहीं लिखा __ हिस्से में हक़ परस्त के आई सलीब है"

    गज़ब ..
    इन लाइनों का लिंक चाहिए ...मैम !

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  16. मोतियों से शेरो से पिरोई ये ग़ज़ल ...आनंद आया पढ़ कर ...मुआफ कीजियेगा ..अनबन देखा है ..हिंदी में अनबन देखी है ..कहा जाता है ...कंगन और मुस्काता बचपन वाले शेर लाजवाब हैं

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  17. आदरणीया...
    भ्रम तोड़ दिया आपने ..... हम तो आपको उर्दू का उस्ताद समझते रहे और आप ने तो हिंदी में भी करिश्मा कर दिया....
    प्रणाम स्वीकारें.



    सूनी आँखें ,लब पर आहें
    क़िस्मत से अनबन देखा है


    झील सी गहरी उन आँखों में
    "उस का पावन मन देखा है"


    नाज़ुक जज़्बों का संवाहक
    हाथों में कंगन देखा है
    क्या धमकदार शेर हैं....

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  18. अभी अभी दानिश साब की तरही पढ़ कर उठा तो इधर चला आया.....छोटी बहर में हिन्दी की बिंदी के साथ खूबसूरत भावों का संयोजन आपा....सुंदर !

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  19. आदरणीया इस्मत ज़ैदी जी
    प्रणाम !
    सादर अभिवादन !

    पढ़ कर तो पहले ही जा चुका हूं ,मात्र उपस्थिति दर्ज़ करने के लिए आज हाज़िर हुआ हूं
    जो रिश्तों को बाँध के रक्खे
    प्यार का वो बँधन देखा है


    बहुत अच्छी ग़ज़ल है … आभार !

    हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  20. जो रिश्तों को बाँध के रक्खे
    प्यार का वो बँधन देखा है

    जीवन का हर रंग हो जिस में
    ऐसा एक सपन देखा है

    मैला मन भी पावन कर दे
    मुस्काता बचपन देखा है

    बोलचाल की ज़ुबान और इतनी गहरी दास्तान...वाह!...बहुत खूब..
    -----देवेंद्र गौतम

    उत्तर देंहटाएं
  21. बहुत ही खूबसूरत और नाज़ुक सी गज़ल..
    मतला बहुत ही सुंदर है.
    "नाज़ुक जज्बों का संवाहक..कंगन" वाह."मैला मन भी पावन कर दे..." बहुत ही प्यारा शेर.

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  22. जो रिश्तों को बाँध के रक्खे
    प्यार का वो बँधन देखा है
    क्या खुबसूरत अहसास
    खुबसूरत दिलकश अलफ़ाज़
    तारीफ के लिए अलफ़ाज़ लाना उतना ही मुश्किल जितना की सूरज को दिया दिखाना वाह लाजवाब

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  23. मिला मन भी .............बचपन देखा है.....बहुत खोबसूरत पंक्ती है.....बचपन से पवित्र कुछ भी नहीं.बहुत दिनों से कमेन्ट पोस्ट ही नहीं हो रहा था .

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  24. aap sabhi sudhijan ka bahut bahut shukriya !!

    @sateesh ji ,ye sher jis ghazal ka hai wo blog par abhi nahin aai hai

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  25. धरती का मन आँगन भीगे
    रिमझिम वो सावन देखा है


    WAAH...............!!!

    KHUDA KARE HAR SAAWAN BARSTA RAHE,
    BHEEGTAA RAHE, BHIGOTA RAHE....

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  26. अंतिम चार पंक्तियाँ बेहद सही और सच्चाई को बयां कर रहे हैं.. खूबसूरत!

    सुख-दुःख के साथी पर आपके विचारों का इंतज़ार है..
    आभार

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  27. bahut sanjeeda aur khoobsoorat ahsaas. bahut pyari gazal........

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  28. ISMAT JI
    AADAB
    AAP KA BLOG PAHLI BAAR DEKHA LAY-OUT KHOOBSURAT HAI.AAPKI KAI EK RACHNA KO PDHA -SHABDON KA CHAYN AUR RACHNA SUNDAR HAI.HINDI SAHITY MEN AAPKA LEKHAN CHARCHA KE LAYK HAI.BDHAI.....

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ख़ैरख़्वाहों के मुख़्लिस मशवरों का हमेशा इस्तक़्बाल है
शुक्रिया