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मंगलवार, 16 मार्च 2010

........ऐतबार मत करना

ग़ज़ल
-_____________________
चला भी जाऊं तो तुम इंतेज़ार मत करना
और अपनी आंख कभी अश्कबार मत करना

उलझ न जाए कहीं दोस्त आज़माइश में
कि ख़्वाहिशें कभी तुम बेशुमार मत करना

मैं जानता हूं कि तख़रीब है तेरी आदत
हरे हैं खेत इन्हें रेगज़ार मत करना

मेरी हलाल की रोज़ी सुकूं का बाइस है
इनायतों से मुझे ज़ेर बार मत करना

जो वालेदैन ने अब तक तुम्हें सिखाया है
अमल करो, न करो, शर्मसार मत करना

सड़क भी देंगे वो पानी भी और उजाला भी
सुनहरे वादे हैं बस,ऐतबार मत करना

मुझे तो मेरे बुज़ुर्गों ने ये सिखाया है
उदू की फ़ौज पे भी छुप के वार मत करना

तुम्हारे काम ’शेफ़ा’ गर किसी को राहत दें
बजाना  शुक्र ए ख़ुदा इफ़्तेख़ार मत करना

तख़रीब= बर्बाद करना ; रेग ज़ार =रेगिस्तान ; बाइस =कारण ;   ज़ेर बार =एहसान से दबा हुआ                                                             इफ़्तेख़ार =घमंड

31 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  2. उलझ न जाए कहीं दोस्त आज़माइश में
    कि ख़्वाहिशें कभी तुम बेशुमार मत करना..

    कितना सच्चा शेर...वाह वाह

    मुझे तो मेरे बुज़ुर्गों ने ये सिखाया है
    उदू की फ़ौज पे भी छुप के वार मत करना.
    इस्मत साहिबा...
    ये तारीखी शेर...एक नसीहत है पूरे समाज के लिये.

    उम्दा गज़ल के लिये मुबारकबाद.

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  3. उलझ न जाए कहीं दोस्त आज़माइश में
    कि ख़्वाहिशें कभी तुम बेशुमार मत करना
    सड़क भी देंगे वो पानी भी और उजाला भी
    सुनहरे वादे हैं बस,ऐतबार मत करना

    Waah !! bahut sahi kaha ...behatreen Gazal.
    Dhanywaad

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  4. चला भी जाऊं तो तुम इंतेज़ार मत करना
    और अपनी आंख कभी अश्कबार मत करना


    उलझ न जाए कहीं दोस्त आज़माइश में
    कि ख़्वाहिशें कभी तुम बेशुमार मत करना
    yaakeen na hoga abhi tumhe hi yaad kar rahi thi aur achnaak nai post dekh yahan aa gayi ,tumhara to jawab nahi itna laazwaab likhti ho ki jitna padhe man nahi bharta .

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  5. सड़क भी देंगे वो पानी भी और उजाला भी
    सुनहरे वादे हैं बस,ऐतबार मत करना
    वाह बेहतरीन

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  6. bahut badiya gazal........

    sandesh detesher bahut pasand aaye .
    shukriya........

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  7. "जो वालदैन ने अब तक तुम्हें सिखाया है
    अमल करो, न करो, शर्मसार मत करना"

    कमाल का लिखा है , इस्मत ! हर लाइन संकलन योग्य है , हार्दिक शुभकामनायें !

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  8. सड़क भी देंगे वो पानी भी और उजाला भी
    सुनहरे वादे हैं बस,ऐतबार मत करना
    वाह बहुत खूब और्
    सड़क भी देंगे वो पानी भी और उजाला भी
    सुनहरे वादे हैं बस,ऐतबार मत करना
    लाजवाब शेर हैं । हर शेर उमदा
    बधाई इस लाजवाब गज़ल के लिये।

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  9. इस्मत,
    ये बनी बात ! हर शेर पे दाद देने की ख्वाहिश मन में मचलती है ! बहुत उम्दा !! बेहतरीन !!! क्या झन्नाटे से गिरे हैं शेर ! शिकायत भी, नसीहत भी और सवाल भी !! भैया खुश हुआ !
    आशीष--आ.

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  10. Ismat ji,
    Bahut sunder ghazal Har sher kasa hua. Is behtarin ghazal ke liye bahut bahut hardik badhai.

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  11. तुम्हारे काम ’शेफ़ा’ गर किसी को राहत दें बजाना शुक्र-ए-ख़ुदा, इफ़्तेख़ार मत करना

    पाकीज़ा एहसास
    और मुक़द्दस जज़्बे से लबरेज़
    मक्ते का ये शेर अपनी मिसाल ख़ुद आप हो गया है....
    यही हिन्दुस्तान की शाइरी है,,,
    जिंदगी की कैफियत से जुडी हुई शाइरी है...
    ख़ुद में भरपूर पैग़ाम लिए हुए एक-एक लफ्ज़
    इस बात की तसदीक़ कर रहा है .

    और....
    मेरी हलाल की रोज़ी, सुकूं का बाइस है
    इनायतों से, मुझे ज़ेरबार मत करना
    ईमान और हक़ की तरफ़दारी करता हुआ
    ये शेर भी ग़ज़ल की अज़मत में इज़ाफ़ा कर पाने में कामयाब साबित हुआ है

    मतले में रवायती अंदाज़ की
    अच्छी निशाँदेही की है आपने...

    उलझ न जाए कहीं दोस्त आज़माइश में
    कि ख्वाहिशें तू कभी बे-शुमार मत करना

    in दो मिसरों में
    जाने क्या कुछ कह दिया गया है...वाह !

    एक शानदार और लाजवाब ग़ज़ल कहने पर
    ढेरों मुबारकबाद !!

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  12. आपके कई शे'र उस्ताद शायर से लगते हैं.यकीनन तगज्जुल में लिख रही हैं.ये तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा:

    उलझ न जाए कहीं दोस्त आज़माइश में
    कि ख़्वाहिशें कभी तुम बेशुमार मत करना

    गुज़ारिश है कि अपनी कुछ ग़ज़लें हमज़बान के लिए भी दें.
    नवाज़िश होगी!

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  13. मेरी हलाल की रोज़ी सुकूं का बाइस है
    इनायतों से मुझे ज़ेर बार मत करना


    waah ...bahut khoob .....!!

    तुम्हारे काम ’शेफ़ा’ गर किसी को राहत दें
    बजाना शुक्र ए ख़ुदा इफ़्तेख़ार मत करना

    बहुत ही नेक ख्याल शे'र .....!!

    जैदी जी हर शे'र लाजवाब लगा .....बधाई ....!!

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  14. जो वालेदैन ने अब तक तुम्हें सिखाया है
    अमल करो, न करो, शर्मसार मत करना

    बहुत खूब

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  15. जैदी साहब...........
    कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनकी तारीफ़ कितनी भी कर लें जी नहीं भरता ......यह ग़ज़ल कुछ इसी तरह की है...... हर एक शेर अपने आप में मुकम्मल......बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर इतनी अच्छी ग़ज़ल पढ़ी.......ग़ज़ल की तारीफ के लिए बस यूँ समझ लें की मेरे पास अलफ़ाज़ नहीं है......

    चला भी जाऊं तो तुम इंतेज़ार मत करना
    और अपनी आंख कभी अश्कबार मत करना
    क्या मतला है........

    उलझ न जाए कहीं दोस्त आज़माइश में
    कि ख़्वाहिशें कभी तुम बेशुमार मत करना
    रिश्तों की असलियत क्या खूब बयां की है............

    मैं जानता हूं कि तख़रीब है तेरी आदत
    हरे हैं खेत इन्हें रेगज़ार मत करना

    इस शेर पर तो हजारों दाद.......
    जो वालेदैन ने अब तक तुम्हें सिखाया है
    अमल करो, न करो, शर्मसार मत करना

    आज की राजनीति को बहुत सटीक साँझा आपने.......
    सड़क भी देंगे वो पानी भी और उजाला भी
    सुनहरे वादे हैं बस,ऐतबार मत करना


    उफ्फ्फ.......क्या कह डाला आपने....!
    तुम्हारे काम ’शेफ़ा’ गर किसी को राहत दें
    बजाना शुक्र ए ख़ुदा इफ़्तेख़ार मत करना

    उत्तर देंहटाएं
  16. मेरी हलाल की रोज़ी सुकूं का बाइस है
    इनायतों से मुझे ज़ेर बार मत करना
    बहुत शानदार शे’र.एक और शेर जो इस गज़ल में मुझे बहुत अच्छा लगा-

    उलझ न जाए कहीं दोस्त आज़माइश में
    कि ख़्वाहिशें कभी तुम बेशुमार मत करना

    बहुत सुन्दर. देर से आई, इसलिये बहुत कुछ कहने को बचा नहीं, सब पहले ही कह दिया गया है.

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  17. "चला भी जाऊं तो तुम इंतेज़ार मत करना
    और अपनी आंख कभी अश्कबार मत करना"
    बहुत सुन्दर ग़ज़ल है. मुबारकबाद!!

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  18. बड़े दिनों बाद एक कोई बेहतरीन ग़ज़ल पढ़ने को मिली। कुछ शेर हैरान कर गये और साथ ही तनिक सी जलन भी दे गये कि हमने क्यों नहीं लिखा ऐसा...
    उदू की फ़ौज वाला मिस्रा तो वल्लाह...क्या बुना है मैम आपने! बहुत खूब!! हासिले-ग़ज़ल शेर तो ये लगा "मेरी हलाल की रोज़ी सुकूं का बाइस है/इनायतों से मुझे ज़ेर बार मत करना"

    हमारी हजारों दाद कबूल फ़रमायें....

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  19. उलझ न जाए कहीं दोस्त आज़माइश में
    कि ख़्वाहिशें कभी तुम बेशुमार मत करना

    ....... बहुत खूब, सभी शेर बहुत उम्दाह है

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  20. आप सब लोग इस ब्लॉग पर तशरीफ़ लाए और अपनी क़ीमती राय और दुआओं से नवाज़ा उस के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

    आप सब को कलाम पसंद आया ,ये मेरी ख़ुश नसीबी है
    शुक्रिया

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  21. मैं इस ब्लॉग पर इतनी देर से क्यों आया, यह बात मुझे खुद समझ में नहीं आ रही। सिर्फ यही गजल ही मैंने नहीं पढ़ी बल्कि अन्य रचनाएं भी देखी हैं। सभी शानदार हैं। उम्मीद है कि अब आना-जाना लगा रहेगा।
    मेरे ब्लॉग पर भी आएं, आपका स्वागत है।

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  22. मुझे तो मेरे बुज़ुर्गों ने ये सिखाया है
    उदू की फ़ौज पे भी छुप के वार मत करना.
    इस्मत साहिबा......subhanallah

    ek acha sandesh bhi preshit karta hai

    bahut bahut badhai

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  23. बहुत देर से आई....गज़ल के जानकार और गज़लगो हर तरह से रचना को समीक्षित कर चुके हैं, काश मैं पहले आ जाती!! कितनी ठाठ की समीक्षा करती!! कोई बात नहीं, अगली गज़ल का इन्तज़ार कर रही हूं. इस गज़ल के सभी शेर बहुत सुन्दर हैं, लेकिन मेरी पसंद-
    जो वालेदैन ने अब तक तुम्हें सिखाया है
    अमल करो, न करो, शर्मसार मत करना
    बधाई.

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  24. उलझ न जाए कहीं दोस्त आज़माइश में
    कि ख़्वाहिशें कभी तुम बेशुमार मत करना

    सड़क भी देंगे वो पानी भी और उजाला भी
    सुनहरे वादे हैं बस,ऐतबार मत करना

    तुम्हारे काम ’शेफ़ा’ गर किसी को राहत दें
    बजाना शुक्र ए ख़ुदा इफ़्तेख़ार मत करना

    behad umda--- ghazal ke har sher mein huqmrani ka andaz aur ghazab ki nazar...

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  25. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  26. जो वालेदैन ने अब तक तुम्हें सिखाया है
    अमल करो, न करो, शर्मसार मत करना

    सुभान अल्लाह...बेहतरीन ग़ज़ल...दाद कबूल करें...
    नीरज

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  27. चला भी जाऊं तो तुम इंतेज़ार मत करना
    और अपनी आंख कभी अश्कबार मत करना

    उलझ न जाए कहीं दोस्त आज़माइश में
    कि ख़्वाहिशें कभी तुम बेशुमार मत करना


    ये दो शेर तो याद करने के लिये अलग नोट कर लिये। बहुत खूब!

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ख़ैरख़्वाहों के मुख़्लिस मशवरों का हमेशा इस्तक़्बाल है
शुक्रिया