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रविवार, 28 फ़रवरी 2010

अन्तर्मंथन




आप सभी सुधिजनों को रंगों के इस पर्व की बहुत बहुत शुभकामनाएं 


अंतर्मंथन
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क्या सच होलिका दहन हुआ ?
क्या क्रोधाग्नि का शमन हुआ ?
या सच्चाई का दमन हुआ ?
और कर्तव्यों का हनन हुआ?

पर्वत ,धरती ,जल और गगन
कितना सुंदर है मेरा चमन,
कौन आया है इस् में  रावण ?
बगिया को मेरी रखे रहन

क्यों होती इक दूजे से जलन ?
क्यों भाई -भाई में अनबन ?
क्यों भूल गए हम भरत मिलन ?
क्या अब भी है धरती पावन ?

है कौन जो इन प्रश्नों को सुने ?
है कौन जो इन के उत्तर दे ?
अब अपने ही अन्दर झांकें
और अपनी सच्चाई आंकें 

क्या हम ने सच्ची कोशिश की ?
नफ़रत हरने की ख़्वाहिश की ?
क्या हम ने प्यार की बारिश की ?
हां ,राजनीति ने साज़िश की 

अब बातें मत तोड़ो मोड़ो ,
जो हुआ उसे पीछे छोड़ो ,
नफ़रत का हर धागा तोड़ो ,
बस ,रंगों से नाता जोड़ो 

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15 टिप्‍पणियां:

  1. होली के पावन अवसर पर लाजवाब प्रस्तुति , आपको होली की बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकानायें ।

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  2. Bahut sunder bhavo kee abhivykti hai aapkee ye rachana.bahuuuutpasand aayee .

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  3. मोहतरमा इस्मत साहिबा, आदाब
    क्या सच होलिका दहन हुआ....
    क्या क्रोधाग्नि का शमन हुआ....
    ..............नफ़रत का हर धागा तोड़ो ,
    बस ,रंगों से नाता जोड़ो.......
    रंगों के इस पर्व पर एक चिंतन करने वाली रचना
    सभी को होली की शुभकामनाएं..

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  4. बहुत सुन्दर कविता. होली की बहुत-बहुत शुभकामनायें.

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  5. अब बातें मत तोड़ो मोड़ो ,
    जो हुआ उसे पीछे छोड़ो ,
    नफ़रत का हर धागा तोड़ो ,
    बस ,रंगों से नाता जोड़ो
    बहुत अच्छा सन्देश दिया है
    होली व ईद की हार्दिक शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  6. अब बातें मत तोड़ो मोड़ो ,
    जो हुआ उसे पीछे छोड़ो ,
    नफ़रत का हर धागा तोड़ो ,
    बस ,रंगों से नाता जोड़ो

    सच्चा और सार्थक संदेश देती अच्छी रचना ...
    आपको और समस्त परिवार को होली की शुभ-कामनाएँ .....

    उत्तर देंहटाएं
  7. अब बातें मत तोड़ो मोड़ो ,
    जो हुआ उसे पीछे छोड़ो ,
    नफ़रत का हर धागा तोड़ो ,
    बस ,रंगों से नाता जोड़ो

    बस इसी की जरूरत है और कुछ नही ।

    होली पर ब‍हु‍त बढिया कविता पोस्‍ट की है आपने ।

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  8. अब बातें मत तोड़ो मोड़ो ,
    जो हुआ उसे पीछे छोड़ो ,
    नफ़रत का हर धागा तोड़ो ,
    बस ,रंगों से नाता जोड़ो
    zabardast ,nishabd kar diya hame to ......
    holi ki bahut bahut shubhkaamnaaye

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  9. बहुत अच्छा । बहुत सुंदर प्रयास है। जारी रखिये ।

    हिंदी को आप जैसे ब्लागरों की ही जरूरत है ।


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  10. आप रोज़ ब रोज़ चकित कर रही हैं,,अपने कलाम से...हिंदी और उर्दू का ज्ञान आपके पास बराबर है.......बहुत ही अच्छी कविता..

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  11. अच्छे भाव जगाती कविता.
    ..होली की ढेर सारी बधाइयाँ.

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  12. "है कौन जो इन प्रश्नों को सुने ?
    है कौन जो इन के उत्तर दे ?
    अब अपने ही अन्दर झांकें
    और अपनी सच्चाई आंकें..."

    दिल की गहराईयों से निकली इक-इक बात
    सीधी दिलों की गहराईयों तक पहुँचती हुई हर बात
    यही है
    आपकी इस पाकीज़ा नज़्म की ख़ासियत....
    हमारे मुआशरे को हमारे समाज को
    हमारे परिवेश को
    ऐसे ही आह्वान की ज़रुरत है आज....

    जज़्बा नेक और सच्चा है
    ये नज़र आता है,,,
    समझ आता है,,,
    महसूस होता है
    भगवान् से प्रार्थना है कि
    आपसी भाईचारा बना रहे
    इंसानियत बनी रहे ,,,ज़िंदा रहे ,,,,हमेशा ...
    अस्तु ....!

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  13. ek ek sawal sateek

    bahut achchi kavita kahi hai aapne holi par

    aapko bhi holi par hardik shubhkamanaayen

    der se aane ke liye kshma chahti hun

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  14. इस्मत,
    मैंने तो खुद अपने लिए ही रूह को रंगनेवाले रंग मांगे थे, और तुमने तो पूरी आवाम को आवाज़ दे दी ! मेरी खुदगर्जी और तुम्हारी उदात्त भावना !!
    होली पर रूह को जगानेवाली सार्थक रचना है, जो आत्म-विश्लेषण को प्रेरित करती है ! बधाई !!
    भाई--आ.

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ख़ैरख़्वाहों के मुख़्लिस मशवरों का हमेशा इस्तक़्बाल है
शुक्रिया