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बुधवार, 11 नवंबर 2009

वंदे मातरम
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धरती माँ ,तू सब की माँ है
तूने ममता सब पे लुटाई
कृपा दृष्टि की सबपे बराबर
सब को इक आँचल में समेटा
तूने न कोई अन्तर जाना
इक तेरा भी जन्मदाता है
नीली छतरी वाला ऊपर
तेरे ये संस्कार भी शायद
उसी इश्वर के कारण हैं
वो भी करे न अन्तर कोई
सब को दे वह दुःख भी सुख भी
सब पायें जल शीतल निर्मल
वर्षा पायें और प्रकाश भी
सूर्य का उज्ज्वल
इस माँ से मानव ने सीखा
कैसे धैर्य dharaa करते हें
हम ने सीखा अहम् हटाकर
कैसे मिलजुल रह सकते हैं
रब ने हम को सब कुछ बख्शा
धरती जैसी माता देकर
नील गगन स साया देकर
सागर जैसा ह्रदय देकर
स्वाभिमान हिम जैसा देकर
फिर भी मानव भूल गया सब
वे सारे उपकार ईश के
भारत माँ की saariममता
धरती की अक्षय सुन्दरता
शब्दों का सुंदर गुलदस्ता
केवल गीतों की है क्षमता
वंदे मातरम कह कर वंदन
धरती माँ का ही करते हें
हम माँ की तारीफ़ करें या
माँ का कुछ गुणगान करें तो
धर्म कभी aare आएगा?
धर्म तो इक मज़बूत किला है
naitiktaa इसकी दीवारें
यकजहती इसका दरवाजा
माँ के पैर के नीचे जन्नत
सब धर्मों ने यही बताया
फिर क्यों और कैसा असमंजस?
वंदे मातरम माँ का है यश
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8 टिप्‍पणियां:

  1. वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद के दौर में ऐसे ही ख्यालात मन्जरे-आम पर लाये जाने की ज़रूरत है.
    मुबारकबाद....
    शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

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  2. वन्दे मातरम को कभी सही परिभाषित नहीं किया गया, लोगो में ग़लतफ़हमी पैदा करके फतवे लिए जाते है असल में हमारे देश में साक्षरता भी बहुत ज्यादा है और फालतू टाइम भी !!

    बस देश बटा रहे और नेता टिका रहे .....

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  3. shaahid saahab,aadab, bahut bahut shukriya ye kaarvaan inshaallah aage badhta rahega.

    *shukriya nadeem ,bilkul sahi baat kahi.

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  4. बहुत खूब लिखा है आपने ! आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
    वन्दे मातरम !

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  5. इस्मत जी मेरे ब्लॉग पर आने और सराहना के लिए आभार ऐसे ही प्रेरणा देते रहिये
    आपने कविता में बहुत सुंदर भाव पिरोये हैं काश इसे वो भी पढें जिनके उपर ग़लतफ़हमी के पर्दे पड़े है
    वन्दे मातरम्
    रचना दिक्षित

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  6. हमारे देश में अब मेरा-तेरा वाद चल पडा है.धरती तो पहले ही बांट दी गई अब दिल बांटने की तैयारी है. सुन्दर और सामयिक रचना.

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  7. dhanyavad,rachna ji,yahi to samasya hai log is prakar ki rachnaon se parhez karte hain.

    dhanyavad vandana ,aise logon ki koshish inshallah bekar ho jayegi.

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ख़ैरख़्वाहों के मुख़्लिस मशवरों का हमेशा इस्तक़्बाल है
शुक्रिया